ऐ नेता तुने झूठे
वादों की मिनार बना डाली,
जात पर वोट मांगकर
आखिरकार तुने अपनी जात दिखा डाली,
चैन की जिंदगी की आस
अब भी है मुझे...
लेकिन रोटी के बदले मंहगाई
बढ़ाकर तुने गरीब की औकात दिखा डाली।
नहीं हूं मैं किसी
से कम ये दुनिया को मैं बताउंगा,
तेरा असली चेहरा
सबके सामने मैं लेकर आउंगा,
बहुत नचाया तुने इस
दुनिया को अपने आगे...
मैं आज का युवा हुं
उंगली की ताकत तुझे दिखाउंगा।
खुद के फायदे के लिए
इस मुल्क को तुने फिर से गुलाम बना डाला,
घटिया राजनीति से
तुने राजनीति का स्तर ही गिरा डाला,
खुद को ऊपर उठाने के
लिए ना जाने तुने कितनों को कुचला होगा...
ठहरेगा तु अब
क्योंकि एक उंगली ने तेरा नसीब लिख डाला।
पांच सालों बाद शक्ल
दिखाने वाले अब तेरा भी वक्त आएगा,
दोनों हाथों से जब
वोट की भीख मांगने तु दरवाजा मेरा खटखटाएगा,
उस वक्त करूंगा तेरे
पिछले सालों का एक-एक हिसाब चुकता...
क्योंकि सरकार बनाने
का एक मौका मेरे पास भी आएगा।
