मोदी सरकार के दो साल….। इन दो सालो में मोदी सरकार ने एकतरफ विभिन्न
योजनाओं की शुरूआत कर जनता की वाह-वाही लूटी तो दूसरी तरफ विवादों ने भी सरकार का
पीछा नहीं छोड़ा। दो साल में मोदी सरकार ने विकास के बीज बो-कर सरकार की गर्दन
ऊंची करी तो वहीं विपक्ष ने भी नाक में दम करके रखा। इन दो सालों में मोदी सरकार
बहुत से फिजूल के बवालों को लेकर विपक्ष के निशाने पर भी रही है। जिस कारण सरकार
की साख पर बट्टा लगा तो साथ ही महत्वपूर्ण बिल भी संसद में पास नहीं हो पाये।
सरकार ने जनता के हितों को ध्यान में
रखते हुए बहुत-सी योजनाएं बनाई। जिनसे करोड़ों की संख्या में लोग भी जुड़े। कुछ
योजनाएं तो अभी भी कारगर है पर कुछ योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं, तो वहीं सरकार के
बहुत से प्रयास शुरूआती दौर के बाद फिके पड़ते हुए दिखाई दिये हैं। भले ही वो
स्वच्छ भारत अभियान हो या सांसद आदर्श ग्राम योजना। शुरू में खुद प्रधानमंत्री जी
ने झाड़ू उठाकर स्वच्छता का संदेश दिया था। लोगों ने बढ़-चढ़कर इसमें सहयोग किया
था। पर दो साल होते-होते यह अभियान दूर-दूर तक दिखाई ही नहीं देता। सिर्फ रेलवे
स्टेशन ही ऐसी जगह है जहां साफ-सफाई दिख जाती होगी। वरना रेलवे स्टेशनों के बाहर,
सड़कों पर, बगीचों में, घरों के आगे, दफ्तरों के पास यहां तक की रेल के डिब्बों
में भी गंदगी देखने को मिल जायेंगी। क्या प्रधानमंत्री जी के हाथ में झाड़ू पकड़कर
फोटो खिंचवाने तक ही सीमित था स्वच्छ भारत अभियान?
बात करें सांसद आदर्श ग्राम योजना कि तो सांसदो ने बड़ी ही फुर्ति के साथ गावों को
गोद लिया था ताकि गांवो का विकास कर सके। पर आज अधिकतर सांसद पैसों की कमी का रोना
रो रहे हैं। कह रहे हैं कि केंद्र का भरपूर सहयोग नहीं मिल पा रहा है। अब ये बात
सांसदो को कौन समझाये की गांवो को गोद आपने लिया है ना कि केंद्र ने। केंद्र अगर
सहयोग ना भी कर पा रहा है तो क्या आप सांसदो की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती उन
गांवों के प्रति? आज सांसद आदर्श ग्राम योजना कहीं कोने में
दबी हुई भी नहीं दिखाई देती है। अगर बात की जाये महत्वपूर्ण बिलों कि तो जीएसटी
बिल दो साल पूरे हो जाने के बाद भी लटका हुआ पड़ा है। सरकार अभी तक जीएसटी बिल को
संसद में पास नहीं करवा पाई है। बिलों की बात करते ही भूमि-अधिग्रहण बिल की बात
ज़हन में आ जाती है। खैर, उसकी तो अब बात ही क्या की जाये। भूमि-अधिग्रहण बिल का
नाम लेते ही सरकार की नाक पर बात आ जाती है।
कुछ ही मोर्चों पर फेल होती मोदी
सरकार निरंतर देश के विकास के लिए काम कर रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मोदी
सरकार का किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से नाता देखने को नहीं मिला है। दो साल में
बहुत-सी नीतियां ऐसी बनायी गई जिनका सकारात्मक परिणाम आने वाले सालों में जरूर
देखने को मिलेगा। सरकार को आने वाले सालों में फिजूल के विवादों से बचते हुए भारत
की अर्थव्यवस्था को नये आयाम देने के प्रयास करने चाहिए। साथ ही जो महत्वपूर्ण बिल
संसद में अब तक पास नहीं हो पाये हैं उन्हें जल्द से जल्द पास करवाने की कवायद
करनी चाहिए।

