Tuesday, 3 May 2016

विवादों की भेंट में संसद (Vivadon ki Bhent me Sansad) #IndianParliament #Haangama





कभी विपक्ष, सरकार के पीछे तो अब सरकार, विपक्ष के पीछे। कभी गाय पर घमासान, तो अब अगस्ता घोटाले की मार। राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए देश की संसद के किमती समय की बर्बादी के अलावा शायद ही कुछ कर रहे है.. मौका मिलते ही विपक्ष, सरकार को घेर लेती है और अब सरकार को मौका मिला है तो वो भला विपक्ष को घेरने में थोड़ी ना पीछे रहेगी। सच से पर्दा उठना चाहिए, पर इन सब विवादों के बीच नेताओं और राजनीतिक दलों को देश की संसद की मर्यादा के बारे में भी सोचना चाहिए। संसद के समय को इन विवादों की भेंट चढ़े जाने से बचाना चाहिए। आखिर वो दिन कब आयेगा जब संसद सुचारू रूप से बिना किसी बाधा के चलेगी?  
कोई विवाद या मुद्दा सामने आता है तो विरोधी दल तुरन्त उस मौके को लपकने के प्रयास में रहते हैं। एक राजनीतिक दल दूसरे राजनीतिक दल पर आरोप पर आरोप लगाये जाता है। अजी! माना... कोई विवाद सामने आया है तो जाँच भी होनी चाहिए और जाँच के बाद दोषियों पर कार्यवाही भी होनी चाहिए। कार्यवाही कर न्याय दिलाने का काम न्यायपालिका का है जो अपना काम तो करेगी ही। पर ना जाने क्यों राजनीतिक दल खुद ही फैसला सुनाने को तैयार रहते हैं। आज राजनीतिक दल भटक से गये हैं। राजनीतिक दलों का काम सिर्फ विरोधी दलों को हाथ लगते ही नीचा दिखाने के सिवाय कुछ और रह ही नहीं गया है। इसी कारण संसद में शोर-शराबे के अलावा आजकल कुछ और ना तो देखने को मिलता और ना ही सुनने को। जब देखो तब किसी ना किसी विवाद को लेकर हंगामा चलता ही रहता है और जब तक सदन की कार्रवाई स्थगित नहीं कर दी जाती तब तक हंगामा रुकने का नाम तक नहीं लेता। एकबार को अगर कार्रवाई फिर से शुरू हो जाती है तो हंगामा भी दोबारा शुरू हो जाता है। इस बीच महत्वपूर्ण बिल भी समय पर पास नहीं हो पाते हैं।
आखिर कब शांति से संसद में सिर्फ और सिर्फ काम को तवज्जो दी जायेगी? कब इन हंगामों से निजात मिलेगी?? आखिर कब इन राजनीतिक दलों और राजनेताओं को संसद के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास होगा???
सवाल बहुत है, पर जवाब सिर्फ एक....
जब राजनेता और राजनीतिक दल अपने स्वार्थ को हावी ना होने दें और संसद की मर्यादा के साथ देश हित की बात सोचे तो बदलाव दिख सकता है। अब देखना यही है कि यह बदलाव कब आता है और कौन इस बदलाव को लेकर आता है।

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