वाह ! प्रधान सेवक जी, वाह ! आपकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. आखिर देश को विकास के पथ पर आगे लेकर जाने वाले आप जैसे प्रधान सेवक की तारीफ तो होनी ही चाहिए. और अब तो आपकी तारीफ के लिए एक और मौका मिल गया क्योंकि आपकी ''गरीबों की सरकार'' अमीरों के लिए बुलेट ट्रेन जो लेकर आ रही है.
कथित विकास को बढ़वा देने वाली आपकी गरीबों की सरकार अब बुलेट ट्रेन के सपने को साकार करने के लिए गरीब मजदूर से पत्थर भी उठाएगी, उनसे गर्मी-सर्दी में काम भी करवाएगी, काम ठीक से नहीं करने पर पैसे भी रोक सकती है या काट सकती है ! और फिर जब सब काम पूरा हो जाएगा तो प्रधान सेवक जी वाहवाही लूटेंगे और फिर बुलेट ट्रेन में अमीर सफर करेगा. सही कह रहा हुं ना सेवक जी ? वो गरीब जो बुलेट ट्रेन के सपने को साकार करने के लिए अब गर्मी-सर्दी में काम करेगा, उसे तो मेहनताना भी उतना नहीं मिलेगा जितना एक तरफा बुलेट ट्रेन की यात्रा का किराया होगा.
विकास होना चाहिए, विकास का मैं भी पक्षधर हुं सेवक जी. लेकिन 'सबका साथ, सबका विकास' वाली फील इसमें नहीं आ रही है. सच कहुं तो मैं तो तीन साल से सबका साथ, सबका विकास वाली फील लेने की कोशिश कर रहा हुं लेकिन ये फील ऐसी है की कभी फील करना चाहुं तो भी फील ही नहीं होती. हर बार गरीबों का साथ लेकर अमीरों का विकास करने वाली फील आती है. लेकिन प्रधान सेवक जी आप भी गजब करते हैं, गंजे को भी कंघी बेच देते हैं फिर बेचारा गंजा भी अफसोस करता रहता है कि वो भी किसके झांसे में आ गया.
बहुत मेहनत और बहुत सालों के इंतजार के बाद देश में बुलेट ट्रेन का सपना साकार होने वाला है. पूरा देश करे ना करे लेकिन मैं तो आपके इस कदम की तारीफ करता हुं. लेकिन प्रधान सेवक जी, बुलेट ट्रेन तो जब चलेगी तब देखा जाएगा, आप ये बताएं कि अपने देश की रेल के हालात कब सुधर रहे हैं ? मंत्री बदलने से सुधर जाएंगे क्या ? नई ट्रेनें चलाने से सुधर जाएंगे क्या ? किराया बढ़ाने से सुधर जाएंगे क्या ? एक कहावत है कि विरोधी भी कई बार सही सलाह दे देता है. तो प्रधान सेवक जी आपके एक विरोधी ने रेल का मंत्री बदले जाने पर गजब की बात कही थी. उन्होंने कहा, 'खूंटा बदलने से नहीं, संतुलित आहार देने से भैंस ज्यादा दूध देगी'. कुछ समझे प्रधान सेवक जी ? चारा खाकर डकार भी ना लेने वाला इंसान आपको सही राय दे रहा है.
लेकिन कुछ भी कहो प्रधान सेवक जी, आप इंसान बड़े गजब के हो. आने वाले दिनों में बुलेट ट्रेन में सफर करेगा अमीर और रोजमर्रा की तरह पेसेंजर या एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल डिब्बे में धक्के खाएगा देश का गरीब इंसान. अरे.. अरे माफ कीजिएगा, जनरल डब्बे में धक्के भी गरीब तभी खाएगा जब उसमें पैर रखने की जगह भी मिल जाएगी. आज के हालात ऐसे बने हुए हैं कि एसी डिब्बे में अमीर इंसान सो के जा रहा है और जनरल डब्बे में गरीब को पैर रखने तक की जगह नहीं मिल पाती है.
कोई बात नहीं प्रधान सेवक जी, आप बुलेट ट्रेन लाइए हम आपके साथ हैं. लेकिन जब नींव ही कमजोर है तो आप महल कैसे बना लेंगे सेवक जी ? जब आए दिन रेल पटरी से उतर रही है और इस कारण से लोगों की भी मौतें हो रही है तो क्या आपकी गरीबों वाली सरकार सिर्फ मृतकों के परिवार वालों को मुआवजे देने तक ही सीमित है क्या ? आप नहीं जानते क्या सेवक जी कि बचाव ही उपचार है. अगर पहले ही पटरियों की मरम्मत के लिए आप पैसा लगाते तो कम से कम लोगों को अपनी जान से तो हाथ नहीं धोना पड़ता. बुलेट ट्रेन लाने की जिम्मेदारी आप ने ले ली लेकिन जब रेल पटरी से उतर रही है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा सेवक जी ? प्रधान सेवक जी, आपने बुलेट ट्रेन की नींव रखी. देश आपको इस काम के लिए दशकों तक याद रखेगा. लेकिन सेवक जी, खराब रेलवे हालातों के कारण सैंकड़ों लोगों की जान जा रही है. इसको कैसे भूलेंगे ?
अब तो प्रधान सेवक जी आपने लोगों पर भी जीएसटी का बोझ डालकर खजाना भरना भी शुरू कर दिया है. थोड़ा उसमें से चवन्नी, अठन्नी फीसदी रेल सुधार में भी लगा दीजिए. बुलेट ट्रेन तो खैर आपके कहे अनुसार 'मुफ्त की सेवा' है, जब बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में कोई पैसा लग नहीं रहा तो रेलवे का बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए आपकी मुठ्ठी क्यों बंद है ?
प्रधान सेवक जी, आपकी बातों से कभी-कभी मैं बढ़ा ही प्रभावित होता हुं. आपने कहा कि बुलेट ट्रेन आने से देश में रोजगार में बढ़ोतरी होगी. वाह ! प्रधान सेवक जी, वाह ! आपके इसी बयान का तो मैं इंतजार कर रहा था. आपके कहे अनुसार देखा जाए तो आप भी ये मानते हैं कि देश में रोजगार में फिलहाल कमी है. मानते हैं कि नहीं ? अगर रोजगार में कमी है तो 3 सालों में आपने रोजगार बढ़ाने के लिए क्या किया ? उल्टा नोटों को बंद करके लोगों के कामकाज ठप्प कर दिए. जब कामकाज ही ठप्प हो गए प्रधान सेवक जी तो रोजगार कहां से बचेगा लोगों का ? यही नहीं, जीएसटी लाकर चीजें सस्ती करने की बजाय महंगी हो गई.
आप ही बताइए प्रधान सेवक जी, लोगों के कामकाज ठप्प होने, रोजगार चले जाने और चीजें महंगी हो जाने से क्या वो बुलेट ट्रेन में सफर करने लायक बचा होगा क्या ? आप अपने अधिकारियों का भत्ता बढ़ा देते हो, वेतन आयोग में बदलाव करके अधिकारियों की मौज कर देते है तो अब कभी आप मजदूर और गरीब तबके को इस लायक बनाएंगे क्या कि वो भी जनरल डिब्बे को छोड़कर बुलेट ट्रेन में सफर कर सके ? उनकी आमदनी बढ़ाएंगे क्या आप ? फिलहाल कुछ लोगों को मिलने वाले फायदे से क्या मेरा देश आगे बढ़ रहा है प्रधान सेवक जी ?




