Thursday, 2 March 2017

खेलोगे कूदोगे बनोगे नवाब (Kheloge kudoge banoge Nawab)



खेलोगे कूदोगे तो होओगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब....

अक्सर यही बात बुर्जोंगों से कभी ना कभी सुनी होगी. सोचें.. समझें.. तो ये बात सही भी है. क्योंकि बिना पढ़ाई लिखाई के आज के दौर में जिंदगी काट पाना मुश्किल है.
सही मायनों में अगर देखा भी जाए तो आज के पढ़े-लिखे लोग जिंदगी जी नहीं रहे बल्कि काट ही रहे हैं. दो पैसे कमाने की जद्दोजहद में पूरा दिन काम में लगे रहते हैं और रात को सिर्फ सोने के लिए ही घर का रुख करते हैं. पढ़ लिखकर भी कौनसा बड़ा तीर मार रहे हैं पढ़े-लिखे लोग ? अरे! तीर तो बिना पढ़े-लिखे लोग बखूबी मार रहे हैं. चायवाला प्रधानमंत्री बन जाता है और पढ़े-लिखे लोगों को ये बात हजम नहीं होती तो वो उसकी डिग्री पर हल्ला काटने लग जाते हैं.

खैर, पढ़े-लिखे लोगों को आजकल गुमान थोड़ा ज्यादा है. तभी तो देश को मेडल दिलाने वाले खिलाड़ियों की उनके दिमाग में सिर्फ एक अनपढ़ की छवि है. ये शब्दों से खेलने वाले लोग नहीं जानते कि देश के लिए खेलना कितना मायने रखता है. इतना तो पता चल गया कि शब्दों के बाण चलाकर वाह-वाही लूटने वाले शब्दों से बाहर की दुनिया से बेफिक्र हैं क्योंकि एक कविता लिखने के लिए चंद पल ही काफी हैं लेकिन देश के लिए एक मेडल लाने के पीछे सालों की मेहनत छिपी होती है.

असल मायनों में पढ़े-लिखे अनपढ़ तो वो हैं जिन्हें देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों का सम्मान नहीं करना आता हो. अभिव्यक्ति की आजादी सबको है लेकिन उस अभिव्यक्ति को व्यक्त करने का सलीका सबको नहीं आता. अनपढ़ और पढ़े-लिखे होने का तकाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पढ़े-लिखे लोगों को आए दिए विरोध का सामना करना पड़ता है जिसकारण वो एक जगह ठहर जाते हैं. वहीं अनपढ़ लोग शांत रहकर अपना काम करते जाते हैं और आगे बढ़ते जाते हैं.

अनपढ़ होना बुरी बात नहीं लेकिन पढ़ लिखकर भी अनपढ़ जैसी बात करना कहीं ज्यादा बुरी बात है. भले ही आप अनपढ़ है, आप में किताबी ज्ञान नहीं लेकिन अगर व्यवहारिकता है तो पढ़े-लिखे लोगों से कहीं ज्यादा अच्छी तरीके से आप जिंदगी जी पाएंगे.

पढ़े-लिखे लोग जहां अपने शब्दों से दूसरों पर कटाछ करते नहीं थकते तो वहीं देश के जख्मों पर खिलाड़ी मेडल के जरिए मरहम का काम करते हैं. पढ़े-लिखे लोगों का दायरा भले ही समंदर जितना होगा लेकिन अनपढ़ लोग भी परिदों से कम नहीं हैं... किसी शायर ने भी खूब कहा है कि..

ऐ समंदर तुझे गुमान है अपने कद पर..
मैं नन्हा सा परिंदा तेरे ऊपर से गुजर जाता हूं...

आज के दौर में देखा जाए तो…. पढ़ोगे लिखोगे तो होओगे खराब, खेलोगे कूदोगे तो बनोगे नवाबकहीं ज्यादा सटीक बैठता है.

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