Thursday, 11 February 2016

खाप पंचायत ( Khap Panchayat )

हम में से बहुत से लोग होगें जो खाप पंचायत के बारे में नहीं जानते होगें और अगर जानते भी होगें तो ज्यादा नहीं जानते होगें। कुछ लोगों ने ग्राम पंचायत का नाम सुना होगा पर दोनों में रात-दिन का अंतर है। 
ग्राम पंचायत में जितने भी सदस्य होते वे सभी जनता द्वारा चुने जाते हैं और समाज कल्याण के लिए काम करते है पर खाप पंचायत, ग्राम पंचायत के बिलकुल उलट होती है। खाप पंचायत में जो सदस्य होते हैं वे जनता के द्वारा नहीं चुने जाते हैं और खाप पंचायत किसी भी युवा चहरे को जगह नहीं देती...। खाप पंचायत ऐसे लोगों का समुह होता है जिनको अपना रौब गाँव पर चलना हो, चाहे घर में उनको कोई इज्जत ना मिले। इनका जनता द्वारा चुनाव नहीं किया जाता है। खाप पंचायत बातें करती है समाज सुधार की पर हकीकत में खाप पंचायतों के द्वारा ऑनर किलिंग को बढ़वा दिया जा रहा है। खाप पंचायत समान गोत्र में शादी के सख्त खिलाफ है। खाप पंचायत के नजरिये में लड़का-लड़की का एक-दूसरे से प्यार करना गुनाह के समान है। खाप पंचायतों द्वारा प्रेमी जोड़ियों को जो की प्यार करते हैं और समान गोत्र में शादी कर लेते हैं, ऐसी जोड़ियों को आत्महत्या के लिए मजबुर कर दिया जाता है या फिर उन्हें बेरहमी से मार दिया जाता है।
क्या सच में प्यार करना गुनाह है? क्या समान गोत्र में शादी करना गुनाह है?
भारतीय कानुन के नजरीये में ना तो प्यार करना गुनाह है और ना ही समान गोत्र में शादी करना गुनाह है। पर खाप पंचायत के नजरिये में भारतीय कानुन का कोई महत्व नहीं है। और ना ही ऐसी जोड़ियों का जो प्यार करते हैं और समान गोत्र में शादी कर लेते हैं।
महत्व है तो खाप पंचायत के खुद के द्वारा बनाये गये कानुन का...
खाप पंचायत के नजरीये में इनका खुद का बनाया कानुन ही सर्वोप्परी है। खाप पंचायत के नजरीये में इनका कानुन गलत नहीं है बल्कि गलत तो वो है जो प्यार करते हैं.... और जो प्यार करते हैं खाप पंचायतों द्वारा उन्हें मार दिया जाता है। ऐसी घटनायें आये दिन होती रहती है पर सरकार कुछ नहीं करती है क्योंकि सरकार को अपने वोट बैंक की परवाह है। अगर सरकार खाप पंचायतों के खिलाफ कोई कार्यवाही करती है तो सरकार के वोट बैंक का एक बहुत बड़ा हिस्सा डगमगा जायेगा और कोई भी सरकार नहीं चाहेगी की उसका वोट बैंक डगमगाये। सब राजनीति करने आये हैं। पता नहीं कितने लोगों की बली चढ़ी होगी ऐसी राजनीति के लिए.....। सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही ना करने पर खाप पंचायतों के हौसले और बुलन्द हो जाते हैं। खाप पंचायतों द्वारा कही गई बात गाँव के लोगों के लिए पत्थर की लकीर के समान होती है और अगर कोई आदमी खाप की बात ना मानें तो उसका अंजाम बुरा ही होता है। खाप पंचायतें ऐसे-ऐसे तुगलकी फरमान जारी करती है की तालिबान और अलकायदा जैसे संगठन भी शरमा जाये।
पिछले दिनों एक ऐसा ही फरमान सुनने में आया था की जो लोग चाउमीन खाते हैं वे लोग बलात्कार को बढ़वा देते हैं और चाउमीन खाने वाले लोग ही बलात्कारी होते हैं। क्या ऐसा सच में होता है? खाप पंचायतों का ऐसा फरमान समाज के सामने एक बहुत ही बेहुदा मजाक है। यह देखकर आश्चर्य होता है की भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसी बिना सिर-पैर वाली बातें खुलेआम होती है और ऐसे लोगों पर कोई कार्यवाही भी नहीं की जाती है। खाप पंचायतों द्वारा कुछ ऐसे फरमान भी सामने आये हैं जो यह दर्शाता है की खाप पंचायतें नारी विरोधी भी हैं। खाप पंचायतों द्वारा लड़कियों के जीन्स पहनने पर रोक लगा देना, मोबाइल रखने पर पाबंदी लगा देना जैसे फरमान संविधान द्वारा नागरीकों को प्रदत मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं। खाप पंचायत कहती है की ऐसा करने से लड़कियों को बलात्कार से बचाया जा सकेगा। क्या सच में ऐसा संभव है? यह तो खाप ही बेहतर जानती है। पर जो लड़की खाप का कोई आदेश मानने से मना कर देती है तो उसका हुक्कापानी बन्द करा दिया जाता है और प्रताड़ित किया जाता है।
हरीयाणा, पंजाब, राजस्थान और उतरप्रदेश में 350 से ज्यादा खाप पंचायतें हैं और इन्हीं राज्यों में महीला और पुरुष का लिंगानुपात सबसे कम है। यहाँ ऑनर किलंग की सबसे ज्यादा वारदातें हुई हैं और लगभग सभी के पीछे किसी ना किसी खाप पंचायत का हाथ रहा है।
मनोज और बबली हत्याकाण्ड, अरुण जातव और बेबी हत्याकाण्ड, योगेश और आशा हत्याकाण्ड ऑनर किलिंग के ऐसे उदाहरण हैं जिन्होनें प्यार किया, शादी की और खाप पंचायत ने इनको बेरहमी से मरवा दिया।
कोई लड़की पढ़-लिख कर आत्मनिर्भर बनती है और अपनी मर्जी से शादी करती है तो यह खाप पंचायत की आँखों में चुभ जाता है और खाप पंचायत कबिलाई अदालत की तरह अपना फैसला सुना देती है। यह फैसला कानुन के लिहाज से बिलकुल बेतुका ही होता है। अगर खाप पंचायतों पर प्रतिबंध लगाने की बात की जाये तो पिछले दिनों एक राजनीतीक दल के एक नेता ने कहा था की यह खाप पंचायतों का कल्चरल परपज़ है इसलिए इन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
महिलाओं पर अत्याचार, जिन्स पहनने और मोबाइल रखने पर रोक, प्यार करने वालों को मौत के घाट उतार देना यह सब उनका कल्चरल परपज़ है।
वाह..!! नेताजी शायद कहना भुल गये होगें की वो तो हमारा वोट बैंक है। हम तो उन पर कोई कार्यवाही कर ही नहीं सकते।
खैर.. खाप पंचायत पर प्रतिबंध लगना चाहिए या नहीं ये फैसला मैं आप पर छोड़ता हुँ। अगर आप चाहतें है की देश में सुधार होना चाहिए, ऑनर किलिंग जैसी घटनायें बन्द हो जानी चाहिए तो आप अपने दम पर कुछ ऐसा करीये जिससे बदलाव आये। आत्मनिर्भर बनो और कहीं भी ऐसी घटना सामने आये तो आवाज उठा । ऐसी आवाज़ उठा की सरकार और खाप पंचायत दोनों की जड़े तक हिल जाये।

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