बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना था की खेल को खेल भावना से ही खेला जाना
चाहिए.. खेल में किसी प्रकार की कोई बेईमानी नहीं की जानी चाहिए अगर खेल में
बेईमानी होगी तो खेल का औचित्य ही क्या रह जायेगा...
पुराने जमाने की यह बात है तो
बिलकुल पते की पर आज कौन इस बात को मानता है और कौन समझता है? इसका आकलन आप खुद
ही कर सकते.. कोई डोपिंग के आरोप में पकड़ा जाता है तो कोई सट्टे के आरोपों में
पकड़ा जाता है।
खेलों में इस तरीके की
घटनायें तो अक्सर हुई ही है पर अब जो घटना हुई है वो खेलों के अन्दर की नहीं बल्कि
बाहर की है.. खेल हो और उत्साह ना हो ऐसा शायद कभी हो नहीं सकता और ये खेलों का
उत्साह कई बार अतिउत्साह का रूप ले लेता जो की अच्छा नहीं होता.. आजकल इसी
अतिउत्साह में लोग क्या-क्या कर बैठते शायद उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं रहता
है। इसी अतिउत्साह में एक बांग्लादेशी क्रिकेट प्रेमी ने ऐसी फोटो सोशल साइट पर
पोस्ट करी जो की भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के लिये किसी अपमान से कम नहीं थी। उस
फोटो के कारण ना सिर्फ क्रिकेट खिलाड़ियों का बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रशंसको के
साथ-साथ पुरे क्रिकेट जगत का अपमान हुआ है। फोटो में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान
महेन्द्र सिंह धोनी का कटा हुआ सिर बांग्लादेश के तेज गेंदबाज तस्कीन अहमद के हाथ
में दिखाया गया है।
यह काफी शर्मनाक है जब किसी खेल प्रंशसक द्वारा ऐसी हरकत की गई है...
ऐसी हरकतें ना सिर्फ खेल को शर्मशार करती है बल्कि दो देशों के बीच अन्दर ही अन्दर
हीन भावना को भी जगाती है... नफरतों के बीज बोने के सिवाय ऐसी हरकतें कुछ नहीं
करती... ऐसी हरकतें सिर्फ एक चिंगारी के जैसी होती है जो की भविष्य में बड़ी आग का
रूप ले लेती है...
क्या ऐसी हरकतों को रोका नहीं जा सकता?
रोका जा सकता है... बिलकुल रोका जा सकता... जब खेल को उत्साह और
रोमांच की हद में रह कर खेल को खेल भावना की तरह उसका आनंद लिया जाये तो सब चीजें
बहुत आसान हो सकती है और ऐसी हरकतें होने से भी रूक सकती है।
ऐसी हरकतों के कारण खेल पर कंलक लग जाता है और जब खेल ही कंलकित हो
जायेगा तो फिर हार-जीत के तो मायने ही क्या रह जायेंगे?
खेल को अपमानित करके कोई जीत कर भी हार जायेगा और खेलों की मर्यादा
रखने वाला हार कर भी जीत जायेगा।
एशिया कप के फाइनल मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को हरा कर एशिया कप
तो अपने नाम किया ही साथ ही क्रिकेट की साख और मर्यादा को भी बनाये रखा।
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