आजकल डिग्री इतनी
महत्वपूर्ण हो गई है कि अब दिल्ली के मुख्यमंत्री जी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी की डिग्री के पीछे पड़ चुके है। अगर कोई आदमी ठीक काम कर रहा है तो उसकी
डिग्री आखिर कहाँ तक मायने रखती है? कहीं अब केजरीवाल साहब
मोदी जी की डिग्री देखने के लिए जंतर-मंतर पर धरना देकर ना बैठ जाये.. धरने से
इनका पुराना नाता जो रहा है.. केजरीवाल साहब का दिल्ली में एक साल बीत चुका है पर
विकास के नाम पर तो कुछ देखने को मिला नहीं ऊपर से साल भर में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप
ही देखने को मिला है। समय की बर्बादी से अच्छा है की मुख्यमंत्री जी अपने काम पर
ध्यान दें ताकी दिल्ली की समस्याओं से जनता को जल्द राहत मिले।
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