Sunday, 13 March 2016

शिक्षित भारत , सक्षम भारत (shikshit bharat shaksham bharat)



अनेकता में एकता, हिन्द की विशेषता और जुबान पर बस एक ही नाम.......... मेरा भारत महान, मेरा भारत महान, मेरा भारत महान !!!
भारत में 125 करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या निवास कर रही हैं और सभी की नजरों में भारत एक महान देश है। पर भारत के अलावा जो देश है क्या उनकी नजरों में भारत एक महान देश है?
खुद की नजरों में तो सब ही अच्छे होते है पर क्या दुसरों की नजरों में हम अच्छे है? सोचने वाली बात है.... अगर हम दूसरों की नजरों से अपना आकलन करेगें तो सही मायने में हमें पता चलेगा की आज आखिर हम कहाँ खड़े हैं, हमारी हैसियत ही क्या है दुनिया के सामने?
दुनिया में विकसित देशों में से एक अमेरीका ऑपरच्युनिटी हब के नाम से जाना जाता है क्योंकि अमेरीका में हर प्रकार के अवसरों की भरमार लगी हुई है। चीन की बात करें तो चीन मैन्युफैक्चरिंग हब के नाम से जाना जाता है।
अगर पाकिस्तान की बात की जाये तो दुनिया के सामने पाकिस्तान की सिर्फ एक ही छवि है...आतंकवाद की छवि। और वहीं अगर दुनिया की नजरों से अपने देश भारत की तरफ देखा जाये तो भारत की सिर्फ एक ही छवि सामने आती है और वो है गरीबी की छवि।
क्या सिर्फ गरीबी की छवि ही बन कर रह गई है हमारी दुनिया के सामने?
अगर ऐसा है तो अब वक्त आ गया है की दुनिया के सामने हमारी इस छवि को सुधारा जाये। यह छवि तभी दूर हो पायेगी जब मेरा भारत, हमारा भारत शिक्षित होकर सक्षम हो पायेगा। जब सब शिक्षित होगें तभी सब सक्षम हो पायेंगे। और जब सब सक्षम होगें तभी इस गरीबी की छवि से छुटकारा मिल पायेगा।
कोई विद्यार्थी टॉप करता है, कोई गोल्ड मेडल हासिल करता है तो कोई मेरीट लिस्ट में स्थान पाता है और फिर वही भारत से बाहर जाकर नौकरी करता है, भारत के बाहर अपनी सेवाऐँ देता है तो फिर भारत सक्षम कैसे होगा? जब ये विदेशों की तरफ रुख ना कर के अपनी सेवाऐं भारत को ही देगें तो भारत तेजी से उन्नति करने लगेगा।
भारत में बहुत से अवसर मौजूद हैं। राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है जहाँ काफी गर्मी पड़ती है। हम सोलर पैनल लगा कर इस गर्मी से ऊर्जा बना सकते हैं। इस ऊर्जा से बिजली का निर्माण कर हम अपने देश की बिजली आपूर्ति तो कर ही सकते हैं साथ ही साथ हम दूसरे देशों को भी बिजली मुहैया करवा कर दुनिया में एनर्जी हब के नाम से जाने जा सकते है।
आँध्रप्रदेश, तमिलनाडू, केरल ये ऐसे प्रदेश हैं जहाँ वर्ष भर तेज हवाएँ चलती रहती है। क्या हम इन हवाओं का फायदा उठाकर ऊर्जा नहीं प्राप्त कर सकते? क्यों नहीं कर सकते..? बिलकुल कर सकते हैं...पर कैसे? हमारे पास ऐसी तकनीकें ही नहीं है जिससे ऐसा सम्भव हो सके। जब हमारे पास ऐसी तकनीकें ही विकसित नहीं है तो क्या सही मायनो में हम विकासशील हैं…??महान हैं...??
झूठी डींगें हाँकने से मेरा भारत सक्षम नहीं होगा और जब सक्षम ही नहीं होगा तो कैसे मेरा भारत महान होगा..?
इतने सारे अवसर अपने ही देश में होने के कारण क्यों हम इन अवसरों का उपयोग नहीं कर पाते..? क्यों हमें छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी दूसरे देशों की मदद लेनी पड़ती है? क्यों हम अपने देश को छोड़ दूसरे देश में अवसर खोजने जाते है? झूठी डिगें हाँकने से सिर्फ दिलासा मिलता है, सम्मान नहीं।
सम्मान पाने के लिए हमें शिक्षित होकर सक्षम बनना होगा। शिक्षित होने से मतलब यह नहीं की डिग्री ले ली और काम हो गया। शिक्षित होने से मतलब है की आप दुनिया के सामने अपने देश की एक अनोखी और अलग छवि बनायें।
और यह सिर्फ अच्छी शिक्षा से ही मुमकिन है। पर सच्चाई तो यह है की आज भारत में पढ़े-लिखे अनपढ़ लोगों की भरमार लगी हुई है। अगर हमारे देश की अनोखी और अलग छवि बननी ही होती तो वो वर्तमान शिक्षा प्रणाली के सहारे से तो अब तक बन चुकी होती पर ऐसा हुआ नहीं। तो क्यों ना हमारी शिक्षा प्रणाली में कुछ ठोस बदलाव किए जाये। ऐसे बदलाव जिससे हम सक्षमता की ओर बढ़ सकें, जिससे हमारे देश की छवि सुधर सकें, जिससे दुनिया वाले भारत को एज्युकेशनल हब बड़े गर्व से कह सकें। शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने होगें। ऐसे बदलाव जिससे हम नम्बरों के पीछे भागना छोड़ दें, ऐसे बदलाव जिससे हम चीजों को रटना छोड़ दें, हमें ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहिए जो हमारी असल जिन्दगी से जुड़ी हो। हमें ज्ञान चाहिए ना की नम्बर। अगर हमारी जिन्दगी प्रेक्टिकल कार्यों पर आधारित है तो हमारी शिक्षा प्रणाली क्यों केवल थ्योरी से भरी हुई है? हमारी शिक्षा प्रणाली अब थ्योरी से ज्यादा प्रेक्टिकल पर आधारित होनी चाहिए। ऐसे प्रेक्टिकल जो जिन्दगी भर कदम-कदम पर काम आयें।
हमें एक ऐसा शिक्षा प्रणाली चाहिए जो हमारे ज्ञान में, हमारी समझ में, हमारे बर्ताव में और हमारे कौशल में ऐसे सकारात्मक बदलाव लेके आये जिसके सहारा हम अपने राष्ट्र के लक्ष्यों की प्राप्ति में भागीदार बन सकें। एक ऐसी शिक्षा प्रणाली जहाँ राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जैसे अनेकों विषयों को जानने और समझने के लिए मोटी-मोटी किताबों में लिखी थ्योरी को खंगालने की जरुरत ना पड़े। एक ऐसी शिक्षा प्रणाली जहाँ अल्फा, बिटा, गामा को बोझ ना समझा जाये और इनको अपनी जिन्दगी से जोड़ कर सरल बना दिया जाये।
अगर मैं अपनी बात करूँ तो मुझे ऐसी शिक्षा प्रणाली नहीं चाहिए जो मुझे पैसे कमाने का जुगाड़ सिखा दे, पैसे तो अनपढ़ लोग भी कमा लेते है। मुझे तो ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहिए जो की मुझे अपने पैरों पर खड़ा होकर जिन्दगी में ऊँचाईयाँ छूना सीखा दें।
सही मायनो में जिस दिन हिन्दुस्तान का हर एक बच्चा ज्ञानवान होगा, असल में उसी दिन तो मेरा भारत महान होगा, हमारा भारत महान होगा....

No comments:

Post a Comment