आजकल डिग्री इतनी
महत्वपूर्ण हो गई है कि अब दिल्ली के मुख्यमंत्री जी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी की डिग्री के पीछे पड़ चुके है। अगर कोई आदमी ठीक काम कर रहा है तो उसकी
डिग्री आखिर कहाँ तक मायने रखती है? कहीं अब केजरीवाल साहब
मोदी जी की डिग्री देखने के लिए जंतर-मंतर पर धरना देकर ना बैठ जाये.. धरने से
इनका पुराना नाता जो रहा है.. केजरीवाल साहब का दिल्ली में एक साल बीत चुका है पर
विकास के नाम पर तो कुछ देखने को मिला नहीं ऊपर से साल भर में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप
ही देखने को मिला है। समय की बर्बादी से अच्छा है की मुख्यमंत्री जी अपने काम पर
ध्यान दें ताकी दिल्ली की समस्याओं से जनता को जल्द राहत मिले।
Friday, 29 April 2016
Wednesday, 20 April 2016
भगवान महावीर (Bhagwan Mahaveer) #Mahaveer
जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी विश्व के उन महात्माओं में से एक है जिन्होंने मानवता के कल्याण के लिए राज-पाट छोड़ कर तप और ज्ञान का मार्ग अपनाया था।
भगवान महावीर स्वामी का जन्म आज से 2615 वर्ष पूर्व वैशाली (बिहार) के निकट कुण्ड ग्राम में क्षत्रीय परिवार में हुआ था। बचपन का नाम वर्धमान था। पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहाँ तीसरी संतान के रूप में चैत्र शुक्ल तेरस को वर्धमान का जन्म हुआ। भगवान महावीर का जन्म राजपरिवार में होने के कारण सुख-सुविधाओं में बीता।
30 वर्ष की आयु में इन्होंने सन्यास ग्रहण कर लिया। केशलोच के साथ उन्होंने घर का भी त्याग कर दिया। 12 वर्ष के कठोर तप के बाद जम्बक में एक शाल वृक्ष के नीचे उन्हें केवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। 30 वर्ष तक महावीर भगवान ने त्याग, प्रेम, और अहिंसा का संदेश फैलाया।
महावीर भगवान ने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया इस कारण वह जिन कहलाये और महावीर भगवान के अनुयायी जैन कहलाते है। जैन धर्म अनादि काल से चला आ रहा है। जैन धर्म में अहिंसा और कर्मों की विशेषता पर विशेष बल दिया जाता है। महावीर भगवान ने मुख्य रूप से तीन सिद्धांत दुनिया को दिये।
इन्हें अगर विश्व सही रूप में अपनाये तो दुनिया में सुख शान्ति हो सकती है।
1.
अहिंसा-
किसी भी जीव को मारना नहीं,
हिंसा
ना करना अहिंसा है। किसी का दिल दुखाना, किसी की स्वतन्त्रता को बाधित करना, किसी के साथ अन्याय
एवं शोषण करना,
किसी
कि आजिविका बन्द कर देना अथवा करा देना ये सब हिंसा है। इनका त्याग ही अहिंसा है।
अहिंसा जैन धर्म की मुख्य देन है। भगवान महावीर ने पशु-पक्षी और पेड़ पौधो तक की
हत्या न करने का अनुरोध किया है। अहिंसा की शिक्षा से ही समस्त विश्व में दया को
ही धर्म प्रधान अंग माना जाता है। भगवान महावीर का जीओ और जीने दो का सिद्धांत जन
कल्याण की भावनाओं को परिलक्ष्ति करता है। दया, करूणा, प्रेम, दान , क्षमा , सत्य आदि सभी गुण अहिंसा में आ जाते है।
2.
अनेकांत-
मैं ही सही हुँ-यह एकान्तवाद और मैं भी सही हुँ-यह अनेकांतवाद। अनेकांत का अर्थ यह
है की वास्तविकता को जानने के लिए अपने दृष्टिकोण के साथ-साथ विरोधी दृष्टिकोण को
भी परखना।
3.
अपरिग्रह-
अपनी आवश्यकताओं को सीमित और मर्यादित करना ही अपरिग्रह है। संतोष परमसुख है तथा
अपनी जरुरत पुरी होने के बाद धन साधन का प्रयोग जन सेवा में करना चाहिए।
आज
की आपाधापि कि दुनिया में तेज गति से बढ़ते वैज्ञानिक परिपेक्ष में आज के मानवीस
समाज में दया,
करुणा
का अभाव हो गया है। आज का जमाना इतना बेदर्द हो गया है कि किसी अपरिचित की मौत
किसी के लिए कुछ मायने नहीं रखती है। सड़क के किनारे कोई आदमी मृत या बेहोश पड़ा हो
तो उसे देखते हुए हजारों लोग निकल जाते हैं पर कोई भी उसकी मदद के लिए झिझक के
मारे आगे नहीं आता है। इसी तरह शव यात्रा में शामिल लोगों में हंसी मजाक की बातें, राजनीतिक चर्चायें
देखने को मिलती है। ऐसे संवेदनहीन जमाने में भी हम महावीर भगवान को याद करतें। आखिर
2500 वर्ष पहले महावीर भगवान ने हमें कौनसे ऐसे मार्ग बताया था जिस कारण वो हमारे
मन मस्तिष्क में समाये हुए है?उन्होंने हमे कुछ ऐसे सिद्धांत दिए थे। उन्होंने हमें अहिंसा का ऐसा सिद्धांत दिया था, एक ऐसा मार्ग बताया था, जिस पर हम चल कर सुख-शान्ति का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि महावीर ने जो रास्ता उस समय बताया था वह उस युग में किसी काम का रहा हो पर आज की दुनिया काफी बदल गई है। पर भगवान महावीर आज भी आउट ऑफ डेट नहीं बल्कि एकदम अप-टू-डेट है। कोई भी आदमी अपने विचारों से ही अप-टू-डेट होता है। भगवान महावीर को भी उनके विचारों के लिए ही जाना जाता है। भगवान महावीर ने अहिंसा का जो उपदेश 2500 वर्ष पहले दिया था उसकी वर्तमान में जितनी आवश्कता है उतनी तो भगवान महावीर के काल में भी नहीं थी क्योंकि आज हिंसा ने भयंकर रूप धारण कर लिया है। आज हम बारूद के ढ़ेर पर बैठे हैं। कहीं से भी एक चिंगारी उठे तो दुनिया चंद लम्हों में ही बर्बाद हो सकती है। हिंसा इतनी खतरनाक हो उठी है की कदम-दर-कदम भय का वातावरण बना हुआ है। इस हिंसा का खात्मा करने के लिए आज भगवान महावीर की अहिंसा की आवश्कता अत्यधिक हो उठी है।
पहले लड़ाईयाँ व्यक्तियों के बीच होती थी, बाद में परिवारों के बीच होने लगी और आज देश लड़ते हैं। रामायण की लड़ाई दो व्यक्तियों की लड़ाई थी, महाभारत की लड़ाई दो परिवारों के बीच थी, सन् 1965 ,1971, 1999 की लड़ाईयाँ दो देशों के बीच थी जब व्यक्ति लड़ते हैं तो व्यक्ति बर्बाद होते हैं, जब परिवार लड़ते हैं तो परिवार बर्बाद होते हैं और जब देश लड़ते हैं तो देश तबाह होते हैं। देश में इंसानों के साथ-साथ खेत-खलिहान, कल-कारखाने, पशु-पक्षी, बाजार भी तहस-नहस हो जाते हैं। देश के तबाह होने का अर्थ है इन सभी का बर्बाद होना, विनाश हो जाना। वर्तमान के परिपेक्ष में कहा जाए तो आज आंतकवादी घटनाओं ने एक विनाशकारी रुप ले लिया है। इस आंतकवाद का कोई धर्म नहीं है। देश में बढ़ती बम-विस्फोट की घटनाएं दिल को दहला देने वाली होती है। सैंकड़ो की संख्या में निर्दोश लोग असमय मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। इस दुख को वही परिवार ज्यादा महसूस करता है जिस परिवार से कोई सदस्य इस दुर्घटना का शिकार हो जाता है। विनाश कि इस भयंकर बाढ़ को रोकने में यदि कोई समर्थ है तो वह एकमात्र भगवान महावीर कि अहिंसा ही है।
भगवान महावीर के समय में अहिंसा कि आवश्यकता जितनी नहीं थी उतनी आज है। भगवान महावीर के रूप में विश्व को उस देवदूत की आवश्कता है जो वयमनस्ता, हिंसा, घृणा, आतंकवाद से निजात दिला कर प्यार, भाईचारा और सद्भाव का निर्माण कर सके। इसलिए आज के इस वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है
Sunday, 10 April 2016
शादी IS EQUAL TO बर्बादी??? (Shadi is Equal to Barbadi ???) #Shadi #barbadi
कहते हैं, शादी का लड्ड़ू जो खाये वो पछताये और जो ना खाये
वो भी पछताये। यह एक ऐसा लड्ड़ू है जिसको एक साथ पुरा खा भी नहीं सकते और खा लें
तो पुरा पचा भी नहीं सकते। अगर शादी के बारे में जानने के लिए और गहरा जायेंगे तो
बहुत से गढ़े मुर्दों को उखाड़ना होगा...खैर मुर्दों को एक बार सोने ही दीजिए।
लोगों को कहते सुना है की
शादी के बाद जिन्दगी बर्बाद हो जाती है। लोगों को शादी बोझ लगने लगती है। आखिर
क्यों होता है ऐसा? क्या किसी ने शादी पर जादू-टोना या झाड़-फूँक किया होता है? अगर किसी परिवार को
आगे बढ़ना है तो शादी जरुरी है पर ऐसी शादी का कोई तुक भी नहीं बैठता जो पटरी से
ही उतरी हुई हो।
सुनने में आया है कि जापान में एक पत्नी ने अपनी पति को इस लिए तलाक
दे दिया क्योंकी उसका पति टूथपेस्ट की ट्यूब से पेस्ट निकालते वक्त ट्यूब को नीचे
से ना दबाकर उसे बीच में से दबाता था और ये बात उसकी पत्नी को पंसद नहीं आती थी।
अरे वाह!! ये तो हद ही हो गई। ऐसा अपने भारत में होता है क्या? अगर होता है तो उस
पत्नी को पागल ही समझेंगे। एक ओर किस्सा ध्यान में आता है कि एक पत्नी ने अपनी पति
को इस लिए छोड़ दिया क्योंकि पत्नी को फेसबुक पर अपने से कम उम्र के लड़के से “TRUE LOVE”
हो गया
था। वाह!! “TRUE LOVE” वो भी
अपने से कम उम्र के लड़के के साथ.....तो इतने दिन पति के साथ क्या वो शादी-शादी खेल रही थी? चीन में एक पति ने
अपनी पत्नी को इस कारण तलाक दे दिया क्योंकि पत्नी दिन भर मोबाइल पर, इन्टरनेट पर
लगी रहती थी और परिवार वालों को समय नहीं दे पाती।
आखिर ये समाज किस ओर जा रहा है? क्या ऐसी घटनायें आजकल सामान्य हो गई है? क्या सच में शादी
एक बर्बादी है या कुछ ओर? लोग कहते है की शादी करके बर्बाद हो गया पर उन
लोंगो को ये नहीं पता कि शादी का लड्ड़ू एक ऐसा लड्ड़ू है जिसको आराम से धीरे-धीरे “प्यार” से खाना पड़ता है। “प्यार” से ना खा कर अगर
जल्दबाजी में खाओगे तो पेट में जिस तरह से गड़बड़ शुरु होती है वैसी ही गड़बड़
शादी के बंधन में शुरु हो जायेगी और फिर दस्त पे दस्त शुरु हो जायेंगे।
शादी उन लोगों के लिए एक वरदान है जो शादी जैसे जीवन भर के रिश्ते को
निभाना जानते हैं। पर शादी उन लोगों के लिए सिर्फ और सिर्फ बर्बादी ही है जो इसे
निभा नहीं पाते। अब जनाब शादी को निभाने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रमाणित कोई एक-दो साल का कोर्स तो
करवाया जाता है नहीं कि शादी करी और इस कोर्स में दाखिला लिया और पास हो गये। शादी
कोई एक रात का खेल भी नहीं है कि जब तक मजा आया खेल लिया और जब मन भर गया छोड़
दिया।
भारतीय समाज में शादी को सात दिनों का नहीं, सात हफ्तों को नहीं, सात महीनों का नहीं और ना
ही सात सालों तक का सीमित बताया गया है बल्कि भारतीय समाज में शादी को सात जन्मों
तक एक दूसरे का साथ निभाने वाला बताया गया है। पर आज के “फैशनेबल” समाज में लोग एक
दूसरे के साथ सात घण्टे भी नहीं बिता पाते हैं, सात जन्म तो बड़ी दूर की बात हो
जाती है। शादी सिर्फ इतनी ही नहीं है कि
गले में मँगलसूत्र डाला, माँग में सिदूँर भर दिया, दो-तीन बच्चे पैदा कर
लिये और काम हो गया। असल शादी तो वो होती है जहाँ शादी जैसे रिश्ते को सम्मान दिया
जाता हो, जहाँ एक-दूसरे को सम्मान दिया जाता हो, जहाँ सिर्फ प्यार हो तकरार नहीं, जहाँ
एक-दूसरे
की भावनाओं को समझा जाता हो। शादी वो नहीं जहाँ साथ मरने की कसमें खायी जाती हो
शादी तो वो है जहाँ साथ जीने की कसमें खायी जाती हो। वही असल में शादी होती
है...पर जनाब आज के लोगों को ये बात कौन समझाये?
मियाँ-बीवी के बीच छोटी-सी कहासुनी होती नहीं की दोनों तलाक तक पहुँच
जाते हैं। क्या तलाक ही सब समस्या का हल है...? जी नहीं, बिलकुल भी नहीं...।
सिर्फ “प्यार” ही हल है। अगर शादी
के रिश्ते को प्यार से सम्भाला जाये तो शादी बर्बादी नहीं है पर प्यार के कारण यह
सात जन्मों का साथ जरुर बन सकती है।
शादी IS NOT ALL
ABOUT
बर्बादी......
शादी IS ALL
ABOUT “LOVE & CARE”………
मुबारक देते है
बार बार,
खुशियाँ आये कई
हजाऱ,
दिल से देते है
हम बधाई,
शादी मुबारक हो
मेरे भाई।
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