Sunday, 10 April 2016

शादी IS EQUAL TO बर्बादी??? (Shadi is Equal to Barbadi ???) #Shadi #barbadi





कहते हैं, शादी का लड्ड़ू जो खाये वो पछताये और जो ना खाये वो भी पछताये। यह एक ऐसा लड्ड़ू है जिसको एक साथ पुरा खा भी नहीं सकते और खा लें तो पुरा पचा भी नहीं सकते। अगर शादी के बारे में जानने के लिए और गहरा जायेंगे तो बहुत से गढ़े मुर्दों को उखाड़ना होगा...खैर मुर्दों को एक बार सोने ही दीजिए।
    लोगों को कहते सुना है की शादी के बाद जिन्दगी बर्बाद हो जाती है। लोगों को शादी बोझ लगने लगती है। आखिर क्यों होता है ऐसा? क्या किसी ने शादी पर जादू-टोना या झाड़-फूँक किया होता है? अगर किसी परिवार को आगे बढ़ना है तो शादी जरुरी है पर ऐसी शादी का कोई तुक भी नहीं बैठता जो पटरी से ही उतरी हुई हो।
सुनने में आया है कि जापान में एक पत्नी ने अपनी पति को इस लिए तलाक दे दिया क्योंकी उसका पति टूथपेस्ट की ट्यूब से पेस्ट निकालते वक्त ट्यूब को नीचे से ना दबाकर उसे बीच में से दबाता था और ये बात उसकी पत्नी को पंसद नहीं आती थी। अरे वाह!! ये तो हद ही हो गई। ऐसा अपने भारत में होता है क्या? अगर होता है तो उस पत्नी को पागल ही समझेंगे। एक ओर किस्सा ध्यान में आता है कि एक पत्नी ने अपनी पति को इस लिए छोड़ दिया क्योंकि पत्नी को फेसबुक पर अपने से कम उम्र के लड़के से “TRUE LOVE” हो गया था। वाह!! “TRUE LOVE”  वो भी अपने से कम उम्र के लड़के के साथ.....तो इतने दिन पति के साथ क्या वो शादी-शादी खेल रही थी? चीन में एक पति ने अपनी पत्नी को इस कारण तलाक दे दिया क्योंकि पत्नी दिन भर मोबाइल पर, इन्टरनेट पर लगी रहती थी और परिवार वालों को समय नहीं दे पाती।
आखिर ये समाज किस ओर जा रहा है? क्या ऐसी घटनायें आजकल सामान्य हो गई है? क्या सच में शादी एक बर्बादी है या कुछ ओर? लोग कहते है की शादी करके बर्बाद हो गया पर उन लोंगो को ये नहीं पता कि शादी का लड्ड़ू एक ऐसा लड्ड़ू है जिसको आराम से धीरे-धीरे प्यार से खाना पड़ता है। प्यार से ना खा कर अगर जल्दबाजी में खाओगे तो पेट में जिस तरह से गड़बड़ शुरु होती है वैसी ही गड़बड़ शादी के बंधन में शुरु हो जायेगी और फिर दस्त पे दस्त शुरु हो जायेंगे।
शादी उन लोगों के लिए एक वरदान है जो शादी जैसे जीवन भर के रिश्ते को निभाना जानते हैं। पर शादी उन लोगों के लिए सिर्फ और सिर्फ बर्बादी ही है जो इसे निभा नहीं पाते। अब जनाब शादी को निभाने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रमाणित कोई एक-दो साल का कोर्स तो करवाया जाता है नहीं कि शादी करी और इस कोर्स में दाखिला लिया और पास हो गये। शादी कोई एक रात का खेल भी नहीं है कि जब तक मजा आया खेल लिया और जब मन भर गया छोड़ दिया।
भारतीय समाज में शादी को सात दिनों का नहीं,  सात हफ्तों को नहीं, सात महीनों का नहीं और ना ही सात सालों तक का सीमित बताया गया है बल्कि भारतीय समाज में शादी को सात जन्मों तक एक दूसरे का साथ निभाने वाला बताया गया है। पर आज के फैशनेबल समाज में लोग एक दूसरे के साथ सात घण्टे भी नहीं बिता पाते हैं, सात जन्म तो बड़ी दूर की बात हो जाती है।  शादी सिर्फ इतनी ही नहीं है कि गले में मँगलसूत्र डाला, माँग में सिदूँर भर दिया, दो-तीन बच्चे पैदा कर लिये और काम हो गया। असल शादी तो वो होती है जहाँ शादी जैसे रिश्ते को सम्मान दिया जाता हो, जहाँ एक-दूसरे को सम्मान दिया जाता हो, जहाँ सिर्फ प्यार हो तकरार नहीं, जहाँ एक-दूसरे की भावनाओं को समझा जाता हो। शादी वो नहीं जहाँ साथ मरने की कसमें खायी जाती हो शादी तो वो है जहाँ साथ जीने की कसमें खायी जाती हो। वही असल में शादी होती है...पर जनाब आज के लोगों को ये बात कौन समझाये?
मियाँ-बीवी के बीच छोटी-सी कहासुनी होती नहीं की दोनों तलाक तक पहुँच जाते हैं। क्या तलाक ही सब समस्या का हल है...? जी नहीं, बिलकुल भी नहीं...।
 सिर्फ प्यार ही हल है। अगर शादी के रिश्ते को प्यार से सम्भाला जाये तो शादी बर्बादी नहीं है पर प्यार के कारण यह सात जन्मों का साथ जरुर बन सकती है।
      शादी IS NOT ALL ABOUT बर्बादी......
       शादी IS ALL ABOUT “LOVE & CARE”………

             मुबारक देते है बार बार,
             खुशियाँ आये कई हजाऱ,
             दिल से देते है हम बधाई,
             शादी मुबारक हो मेरे भाई।

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